Friday, July 31, 2015

मेमन के प्रति दया दिखाने वाले देशद्रोही - शिवसेना

शिवसेना ने याकूब मेमन के प्रति नरमी दिखाने की मांग करने वालों पर निशाना साधते हुए आज कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ देश के शत्रु होने के मामले में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
पार्टी ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि 1993 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों का दोषी याकूब लोगों की नजरों में शहीद ना बन पाए।
शिवसेना ने कहा कि 1993 में हुए बम विस्फोटों के पीड़ितों की आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब इन विस्फोटों के मुख्य षडयंत्रकर्ता और मास्टरमाइंड टाइगर मेमन और दाउद इब्राहीम को देश वापस लाकर फांसी दी जाएगी।
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में छपे एक संपादकीय में कहा कि करीब 50 लोगों ने याकूब मेमन के प्रति दया दिखाने की मांग करते हुए पत्र लिखा था। इन लोगों ने मुंबई हमलों में अपने किसी करीबी को नहीं खोया है और इसीलिए वे दया दिखाने की मांग कर रहे थे, लेकिन राष्ट्रपति और उच्चतम न्यायालय ने उनकी बात नहीं सुनी और देश के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
शिवसेना ने मांग की है कि जिन लोगों ने मेमन के प्रति दया दिखाए जाने की मांग की थी, उनके खिलाफ देश के दुश्मन होने का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
शिवसेना ने कहा, 'मेमन को फांसी दे दी गई है और अब सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए कि उसे लोगों के समक्ष बेगुनाह या शहीद दिखाने का प्रयास नहीं हो।' पार्टी ने कहा कि मुंबई में हुए सिलसिलेवार विस्फोट पाकिस्तान का देश पर किया गया हमला थे। पड़ोसी देश भारत के खिलाफ हमलों की लंबे समय से योजना बना रहा है।
शिवसेना ने संपादकीय में कहा, 'दाउद और टाइगर पाकिस्तान में हैं। याकूब भी पाकिस्तान भाग गया था और वह बाद में लौट आया। केवल इसलिए दया दिखाने में क्या औचित्य है कि वह भारत लौट आया? उसके खिलाफ मजबूत सबूत थे और उसके वकीलों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की।' पार्टी ने इस विषय पर चर्चा करने का सुझाव दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद अब तक जीवित हैं।
उसने कहा, 'असदुद्दीन ओवैसी ने जो बात उठाई है वह विचार करने योग्य है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद जीवित हैं क्योंकि उनकी राज्य सरकारें उन्हें मृत्युदंड दिए जाने के खिलाफ हैं।'
शिवसेना ने कहा कि इस बात पर चर्चा हो सकती है और कानूनी लडाई भी लड़ी जा सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर उस व्यक्ति की दया याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती जो मुंबई बम विस्फोटों में सैकड़ों लोगों की मौत का जिम्मेदार है

Tuesday, July 28, 2015

भावपूर्ण श्रद्धांजलि – शत शत नमन

पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने जिस वक्त आखिरी सांस ली थी, उस वक्त उनके करीबी सहयोगी सृजन पाल सिंह वहीं थे। उन्होंने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर डॉक्टर कलाम के आखिरी पलों का जिक्र किया है। हम सृजन पाल सिंह की फेसबुक पोस्ट से उन पलों की कहानी आपके सामने रख रहे हैं:
"
हम लेक्चर हॉल में गए। वह लेट नहीं होना चाहते थे। वह हमेशा कहते थे कि छात्रों से इंतजार नहीं करवाया जाना चाहिए। मैंने तुरंत उनका माइक सेट किया, लेक्चर के बारे में थोड़ा ब्रीफ किया और कंप्यूटर संभाल लिया। जैसे ही मैंने उनका माइक सेट किया, वह मुस्कुराए और बोले, 'Funny Guy! सब ठीक है न?'
जब कभी वह Funny guy कहते, इसके कई मतलब निकलते। इसका मतलब इस बात पर निर्भर करता कि उनकी टोन कैसी थी और आपने क्या अंदाजा लगाया। इसका मतलब यह हो सकता है कि तुमने बहुत बढ़िया काम किया और यह भी कि तुमने कुछ गड़बड़ कर दी है। पिछले 6 सालों में मुझे 'Funny guy' का मतलब समझ आना शुरू हो गया था। इस बार इसे समझने का आखिरी मौका था।
'Funny guy!
सब ठीक है?', उन्होंने कहा। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, 'जी हां।' ये उनके कहे आखिरी शब्द थे। मैं उनके पीछे बैठा था। उनके दो मिनट के भाषण के बाद मैंने कुछ महसूस किया कि उन्होंने कुछ ज्यादा ही लंबा ठहराव ले लिया है। जैसे ही मैंने उनकी तरफ नजर उठाई, तभी वह गिर गए।
हमने उन्हें उठाया। डॉक्टर दौड़ता हुआ आया और हमने वह सब कुछ किया, जो कर सकते थे। मैं उनकी बिल्कुल थोड़ी सी खुली आंखों का वह मंजर नहीं भूल सकता। एक हाथ से मैंने उनका सिर पकड़ा था। उनका हाथ मेरी उंगली पर भिंचा हुआ था। उनके चेहरे पर स्थितरता थी और उनकी उन खामोश आंखों से मानो ज्ञान की आभा बिखर रही थी।
उन्होंने कुछ नहीं कहा। उनके चेहरे पर दर्द का भी नामो-निशान तक नहीं था। पांच मिनट के अंदर हम नजदीकी अस्पताल में थे। कुछ ही मिनटों में उन्होंने हमें बताया कि मिसाइल मैन ने उड़ान भर ली है, हमेशा के लिए। मैंने आखिरी बार उनके चरण स्पर्श किए। अलविदा बुजुर्ग दोस्त! महान परमार्शदाता! विचारों में दर्शन करूंगा और अगले जन्म में मुलाकात।"


हमारी ओर से उस महान हस्ती को भावपूर्ण श्रद्धांजलि – शत शत नमन 

Monday, July 27, 2015

अंधविश्वास के कारण

आज की तारीख में अनेक बाबाओं और तांत्रिकों का धंधा अंधविश्वास के कारण ही चल रहा है। सच कहा जाए तो अंधविश्वास फैलाने वाले काफी संगठित और मजबूत हैं, तभी तो उनका विरोध करने पर नरेंद्र दाभोलकर जैसे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। संविधान में वैज्ञानिक सोच को आगे बढ़ाने के संकल्प के बावजूद कार्यपालिका और विधायिका के स्तर पर अंधविश्वास से लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई देती।
महाराष्ट्र में भले इस मामले में कानून बन गया हो, लेकिन ज्यादातर राज्य इसे लेकर उदासीन हैं। अक्सर जाने-अनजाने प्रशासन ही इसे बढ़ावा देता रहता है। अंधविश्वास विकास और तरक्की के रास्ते में बड़ी बाधा है। सरकार को चाहिए कि वह अफवाह फैलाने वालों से सख्ती से निपटे और लोगों को जागरूक करे। आज अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच के खिलाफ सामाजिक आंदोलन की जरूरत है। इसके लिए सरकार, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और प्रबुद्ध वर्ग को एकजुट होना होगा।

समाज में आज भी अंधविश्वास की जड़ें बेहद मजबूत हैं। इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में सिलबट्टों को लेकर फैली एक अफ‌वाह के कारण लोगों में दहशत है। कहा जा रहा है कि रात में सिलबट्टों पर खुट-खुट की आवाज आती है और ये टंके हुए यानी ठोके हुए मिलते हैं। कुछ लोगों का कहना है यह काम कोई 'चुड़ैल' कर रही है।  लड़कियों को अंधविश्वास के कारण सगे-संबंधियों की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है सही डॉक्टर से सलाह नहीं ली जाती और महंदीपुर के हनुमान मंदिर में भूत प्रेत का इलाज करवाने के लिए हजारों रुपये नष्ट हो जाते हैं । जबकि वास्तविक्ता यह होती है कि बच्चों का होमोग्लोबिन कम होने से उन्हे चक्कर आने लगता है और पाचन तंत्र ठीक नहीं होने से पेट में जलन होने लगती है उसका उपचार न कराकर महंदीपुर के हनुमान मंदिर में भूत प्रेत का इलाज करवाने के लिए हजारों रुपये नष्ट करना कहाँ का विश्वास है ?
हैरानी की बात है कि इन सब में पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हैं। निश्चय ही शरारती तत्वों ने शुरू में अफवाह फैलाई होगी और लोगों ने बिना सोचे-समझे उसे सच मान लिया। हालांकि इस बारे में सचाई का पता लगाने की कोशिश हो रही है। कुछ लोगों की राय है कि एक खास तरह का कीड़ा सिलबट्टों पर छेद कर रहा है। माना जाता है कि ज्यों-ज्यों जीवन में विज्ञान और तकनीक का दखल बढ़ेगा, हमारी सोच भी बदलेगी। पर इन दोनों में कोई सीधा और सरल संबंध नहीं है।
आज गांव-गांव में मोबाइल, जेनरेटर और दूसरे उपकरण पहुंच चुके हैं, पर इससे सोच में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया, बल्कि नई तकनीक के जरिए कठमुल्लापन को और आगे बढ़ाया जा रहा है। गांव तो गांव, शहरों से भी अंधविश्वास के कारण सगे-संबंधियों की हत्या किए जाने की खबरें अक्सर आती रहती हैं। दरअसल हमारी शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमी यह है कि वह वैज्ञानिक सिद्धांतों के बारे में सब कुछ बता देती है, पर हमारे भीतर वैज्ञानिक सोच नहीं पैदा कर पाती। फिर अंधविश्वास का संबंध समाज के पावर स्ट्रक्चर से भी है। अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए एक ताकतवर तबके ने अंधविश्वास को पाल-पोसकर रखा है। बहुतों के लिए यह एक व्यवसाय है।

लीज भूखंडों को बेचा जा चुका

बीएमसी प्रशासन ने 4,200 भूखंडों को लीज पर दिया था। इनमें से 8 भूखंड बेचे जाने का मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीएमसी ने जिन किराएदारों को जमीनें लीज पर दी थीं, उन्होंने बिना बीएमसी को बताए उन भूखंडों को बिल्डरों के नाम कर दिया। दादर, मांटुगा, नागपाडा व मांडवी इलाके के 8 भूखंडों का लेन-देन किराएदारों द्वारा किए जाने का खुलासा हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक, बीएमसी ने 1936 में 4,200 भूखंडों को 999 सालों के लिए लीज पर दिया था। दादर-माटुंगा में नगर भू-क्रमांक 210 'सी' 586.12 स्क्वेयर फीट और नगर भू- क्रमांक 'ई' 1201.52 स्क्वेयर फीट, इन दोनों जमीनों को बीएमसी ने फरवरी 1936 में ही 999 सालों के लिए त्रयंबकलाल कुबेरदास कटाकिया को किराए पर दिया था। इन दोनों ही भूखंडों को 2008 में नीतनाव कंस्ट्रक्शन के नाम पर किया जा चुका है। मांडवी स्थित नगर भू-क्रमांक 1902 और 1903 को बीएमसी ने आमिर कानोरवाला और सिराज दोहाडवाला को 999 सालों के लिए लीज पर दिया था।
दादर-माटुंगा स्थित नगर भू-क्रमांक 321 ई और 321 एफ को भी नवनीतलाल कनकिया, जसवंतलाल कनकिया और तापिदास दलाल को 964 सालों के लिए लीज पर दिया गया था। इन चारों भूखंडों को फिलहाल भोपाल असोसिएट्स को बेचा जा चुका है। नागपाडा स्थित नगर भू-क्रमांक 51 और 52 को बीएमसी ने रेऊबेन जॅकब मॅथेलान और रावसाहेब देवजी धरसी को 999 सालों के लिए लीज पर दिया था। इन दोनों ही भूखंडों को लकडवाला डिवेलपर्स को बेच दिया गया है।

Thursday, July 23, 2015

जरा इधर भी नजर कीजिए

एक लड़की ने चुपचाप एक स्कूल टीचर को पिछले हफ्ते चिट्ठी दी थी। यह कोई साधारण खत नहीं था। इस खत के जरिए लड़की ने छुट्टी नहीं मांगी थी। इस हताश लड़की ने परेशान होकर टीचर को खत लिख मदद मांगी थी। लड़की ने चिट्ठी में लिखा था कि पिता उसके साथ रेप करता है। उसकी मां चुपचाप देखती है लेकिन कुछ करती नहीं।
टीचर ने खत पाने के बाद वाशी में एक लोकल एनजीओ से संपर्क साधा। एनजीओ ने उस विकृत माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पिछले हफ्ते आठवीं क्लास में पढ़ने वाली 13 साल की इस स्टूडेंट ने अपने टीचर को खत लिखा तो डराने वाला वाकया सामने आया। उसने लिखा था, मेरा पिता मुझसे रेप करता है और मां चुप रहती है।'
लड़की के खत को पढ़ने के बाद बुरी तरह से टूट चुके टीचर इस मामले में एक भी शब्द कहने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं। उन्होंने चिट्ठी को पढ़कर तत्काल फेंक दिया। उन्हें डर था कि उसकी चिट्ठी कोई और पढ़ सकता है। टीचर ने लोकल एनजीओ से संपर्क साधा था। एनजीओ की मदद से ही एफआईआर दर्ज की गई थी। सोमवार की रात पिता और लड़की की मां दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
पुलिस ने कहा, '45 साल के लड़की का पिता फल बेचता है। पुलिस को दिए बयान में लड़की ने कहा है, 'मां के सामने मुझसे मेरा पिता रेप करता है। रेप के बाद मेरी मां मुझे खाने के लिए कुछ दवाई देती थी। जब मैं सात साल की थी तब से ही मेरा बाप मेरे साथ रेप कर रहा है।'  शिकायत के बावजूद मेरी मां ने मदद करने से इनकार कर दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह प्रेगनेंसी से बचने के लिए मां की तरफ से दी जाने वाली दवाई की जांच कर रही है। रेप पीड़िता की एक बड़ी बहन और एक बड़ा भाई है। इसके साथ ही पीड़िता के दो और छोटे भाई हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि जब भाई-बहन घर पर नहीं होते थे तब पिता रेप करता था।  उसने पुलिस से कहा, 'जब मेरे भाई घर पर नहीं होते थे तब पिता रेप करता था। मेरे भाई का घर पर न होना पिता के लिए रेप करने का सुरक्षित मौका होता था। मेरी मां के सामने वह घर में रेप करता रहा लेकिन मां ने मेरी कभी मदद नहीं की।' लड़की ने पुलिस से कहा कि उसने अपनी 17 साल की बहन को भी इस वाकये के बारे में बताया था।
पुलिस ने बताया कि उसकी बड़ी बहन परिवार के साथ नहीं रहती थी। लड़की ने बताया कि उसकी बड़ी बहन पर भी पिता ने यौन हमले किए थे। लड़की ने यह भी बताया कि उसने इससे पहले रेप के बारे में अपने पड़ोसियों को बताया था लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। पड़ोसियों ने कहा था कि वह खुद ही पुलिस से संपर्क साधे।
वाशी पुलिस स्टेशन के एक पुलिस ऑफिसर ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया, 'कुछ एनजीओ नवी मुंबई के स्कूलों में यौन उत्पीड़न पर काउंसलिंग क्लास शुरू की थी। इसी क्लास के दौरान लड़की ने महसूस किया कि उसे अपने पैरंट्स के खिलाफ बोलना चाहिए।'
पुलिस ने इस मामले में रेप पीड़िता की मां से पूछताछ की है। मां ने अपनी बेटी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। महिला ने दावा किया कि उसे 15 दिन पहले पता चला कि उसका पति बेटी के साथ रेप करता है। महिला ने कहा कि उसने जानने के बाद अपने पति को डांटा और बेटी से अलग रहने को कहा है। फिलहाल लड़की को एनजीओं के संरक्षण में रखा गया है।
लड़की के माता-पिता के खिलाफ इंडियन पिनल कोड के सेक्शन 376(रेप), सेक्शन 5 और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रोम सेक्शुअल ऑफेंस ऐक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इस मामले अभी केवल पिता को अरेस्ट किया गया है। लड़की के पिता को थाणे कोर्ट में मंगलवार को पेश किया गया था। फिलहाल उसे गुरुवार तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस शाहजी उमा ने इस वाकये की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पिता को अरेस्ट कर लिया गया है। शाह ने कहा कि इस वारदात में मां की भूमिका की जांच की जा रही है। पीड़िता ने दावा किया है कि उसकी मां के सामने रेप होता था और वह चुप रहती थी। पीड़ित लड़की ने मां पर रेप के बाद दवाई देने का भी आरोप लगाया है।

Wednesday, July 22, 2015

याकूब की फांसी का दिन तय

आतंकवाद निरोधी टाडा अदालत के फैसलों में ट्रैजेडी का एक रंग है। पहले अदालत ने रहीन मेमन को आजाद कर दिया और अब उसे विधवा होने की सजा दी है।
रहीन, याकूब मेमन की बीवी हैं। उनका कहना है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद से ही वह परेशान हैं। वह अभी तक इस फैसले को गले से नीचे नहीं उतार पा रही हैं। उन्होंने कभी इस तरह के फैसले की कल्पना भी नहीं की थी। रहीन को सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक बुरे और डरावने सपने की तरह लग रहा है।

याकूब मेमन को 27 जुलाई, 2007 को 1993 मुंबई बम धमाकों में शामिल होने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी माफी याचिका खारिज करते हुए उसकी फांसी का दिन 30 जुलाई को तय किया है।
पिछले कुछ दिनों से रहीन का यही हाल है। जब से याकूब की माफी याचिका पर सुनवाई की तारीख घोषित की गई थी, तब से ही रहीन परेशान थीं। हालांकि अब फैसला आ जाने के बाद वह कह रही हैं कि वह अपने पति के लिए लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें अल्लाह के साथ-साथ देश के कानून पर भी पूरा भरोसा है। और सबसे बढ़कर, रहीन का मानना है कि याकूब निर्दोष हैं। उनका कहना है कि याकूब ने अपनी बेटी की कसम खाकर कहा था कि वह बेगुनाह हैं। रहीन भरोसा दिलाती हैं कि अगर याकूब सच में दोषी होते, तो वह बहुत पहले ही उसका साथ छोड़ चुकी होतीं। 


रहीन को सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि याकूब खुद लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करने वापस लौटा था, लेकिन फिर भी उसे फांसी की सजा सुना दी गई है। उनका सवाल है कि अगर याकूब ना लौटा होता तो भी क्या उसके साथ यह सब होता।

'
क्या हम आदिम जमाने में रह रहे हैं? सिर्फ समाज के लिए ही क्या एक भाई को 14 साल तक जेल की सलाखों के पीछे रखना और अपने भाई के गुनाहों के लिए उसे फांसी दे देना सही है? याकूब को फांसी इसलिए हो रही है क्योंकि उसके नाम के साथ मेमन जुड़ा है। इस सरनेम ने उनको तबाह कर दिया,' रहीन ने कहा।
पहली बार मीडिया से बात करते हुए (आज तक मेमन परिवार के किसी भी व्यक्ति ने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया है), रहीन का कहना है कि उन्होंने पूरी कानूनी प्रक्रिया पर बहुत भरोसा किया था। वह कहती हैं कि याकूब हमेशा उनसे कहता था कि वह जेल से बाहर आ जाएगा क्योंकि वह बेगुनाह है। उनका सवाल है कि अगर याकूब दोषी होता तो वह लौटकर भारत क्यों आता और क्यों खुद को कानून के हवाले करता।
रहीन कहती हैं कि टाइगर और अयूब मेमन लौटकर नहीं आए क्योंकि वह जानते हैं कि उन्हें सजा जरूर होगी। मालूम हो कि टाइगर और अयूब को 1993 के मुंबई धमाकों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। दोनों फरार हैं।
यह पूछे जाने पर कि आत्मसमर्पण के पहले क्या उनका सरकार के साथ कोई समझौता हुआ था, रहीन ने कहा कि वह लोग इसलिए लौटकर आए क्योंकि करांची में उन्हें नजरबंद रखा गया था। उन्हें वहां इस तरह रहना पसंद नहीं था। वह भारत को याद करते थे, अपना घर याद करते थे और बिना किसी गलती के गुनहगार बनकर शर्मिंदगी के साथ नहीं जीना चाहते थे। वह कहती हैं कि करांची में रहते हुए वह अक्सर याकूब से कहती थीं कि उन्हें माहिम की साड़ी पहनी हुई मछुवारनों को देखने जैसी छोटी-छोटी बातें याद आती हैं।
यह पूछे जाने पर कि आत्मसमर्पण के लिए उन्होंने एक साल तक इंतजार क्यों किया, रहीन बताती हैं कि वह ससही समय का इंतजार कर रहे थे। उनकी बेटी पैदा होने वाली थी जिसके कारण उन्होंने जल्द सबकुछ निपटाने का फैसला किया। वह कहती हैं कि असल में याकूब खुद ही 19 जुलाई 1994 को भारत लौट आया था, फिर भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने का दावा किया।

वह बताती हैं कि याकूब को अपनी बेगुनाही पर भरोसा था। उसे सीबीआई पर भी यकीन था। रहीन कहती हैं कि याकूब की गलती यह थी कि उसने कभी अबू सलेम की तरह लिखित तौर पर कोई शर्त नहीं रखी और न ही आश्वासन लिया।
यह पूछे जाने पर कि 12 मार्च 1993 को हुए धमाकों से केवल 2 दिन पहले ही क्यों उनका पूरा परिवार भारत छोड़ कर चला गया, रहीन बताती हैं कि उनके सास-ससुर और टाइगर-अयूब 10 मार्च को ही चले गए थे। अयूब ने दुबई से याकूब को फोन किया और कहा कि याकूब और रहीन भी उन्हीं के साथ ईद मनाएं। रहीन कहती हैं कि भारत से जाने का यही कारण था। वह कहती हैं कि वे लोग अक्सर दुबई जाते रहते थे। इसमें कोई नई बात नहीं है। वह कहती हैं कि एक महीने दुबई में रहने के बाद ही टाइगर के कहने पर वे लोग करांची चले गए थे।
यह पूछे जाने पर कि टाइगर का बर्ताव घर पर कैसा था, रहीन बताती हैं कि टाइगर मुश्किल ही घर पर रहता था। घर की 5वीं मंजिल पर वह अपनी पत्नी और 2 बच्चों के साथ रहता था। याकूब और रहीन 6ठी मंजिल पर याकूब के माता-पिता के साथ रहते थे। रहीन, टाइगर के बारे में बात करने से मना कर देती हैं। रहीन बताती हैं कि टाइगर ने अपने पिता की मौत के बाद फोन तक नहीं किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उनके पास अन्य गवाहों के बयान के बाद सबूत है कि मुस्लिम युवाओं को हथियार की ट्रेनिंग के लिए भेजने के लिए टिकट लेकर आया था। अदालत ने माना कि याकूब ने अकाउंट से लेकर पैसे के लेन-देन का पूरा काम संभाला।
रहीन मानती हैं कि याकूब को टाइगर के स्मगलिंग बिजनस के बारे में पता था। वह कहती हैं कि पता होने के बावजूद याकूब कभी टाइगर के किसी दोस्त या परिचित के साथ बात नहीं करता था। वह कहती हैं कि याकूब के कई हिंदू दोस्त थे। अगर उसे टाइगर की साजिश के बारे में पता होता तो उसने सबसे पहले पुलिस को खबर दी होती।
यह पूछे जाने पर की फांसी का फैसला आने पर याकूब ने क्या कहा, रहीन बताती हैं कि याकूब ने जज को माफ कर दिया है क्योंकि वह नफरत के सिलसिले को खत्म करना चाहता है। रहीन कहती हैं कि याकूब लड़ते-लड़ते थक चुका है।
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जुलाई को याकूब की फांसी का दिन तय हो चुका है, लेकिन अभी भी रहीन को उम्मीद है कि वह सही-सलामत जेल से बाहर आ जाएगा।

Tuesday, July 21, 2015

मुंबई का जनजीवन अस्त-व्यस्त

मुंबई की बारिश ने एक बार फिर अपना रंग दिखा दिया। मंगलवार को हुई भारी बारिश की वजह मुंबई का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। रेलवे स्टेशन लेकर सड़कों तक, लोगों और शहर की रफ्तार पर लगाम लग गई। कई सबअर्बन ट्रेनों के संचालन में देरी के साथ-साथ सड़कों पर यातायात में भी समस्या आई। एयरपोर्ट पर प्लेन की लैंडिंग के लिए भी पायलेट्स को कई बार ट्राइ करना पड़ा।
कई जगहों पर घरों और सड़कों पर जलभराव की भी समस्या आई। और तो और, कई जगहों पर दीवारें तक गिर गईं। मुंबई एयरपोर्ट पर उतरने वाली चार फ्लाइट्स के पायलेट को लैंडिंग के लिए दोबारा प्रयास करने के लिए कहा गया। मौसम इतना खराब था कि एक बार में सेफ लैंडिंग की गुंजाइश नहीं थी।
थाने आपदा प्रबंधन सेल ने शाम को पांच बजे के आसपास हाई टाइड की चेतावनी देते हुए लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी है। तेज बारिश की वजह से मुंबई में सेंट्रल रेलवे की ट्रेनें आधे घंटे की देरी से चल रही हैं और वेस्टर्न रेलवे की ट्रेनें 15-20 मिनट की देरी से चल रही हैं। इसके अलावा बारिश के चलते खराब हुए मौसम की वजह से वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर भी यातायात प्रभावित हुआ।