Friday, May 20, 2011

चार लोगों को गिरफ्तार किया

गुरुवार को क्राइम ब्रांच की यूनिट 7 ने मोटर साइकल चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अहसान सुलतान शेख (28), शरीफ गफ्फार पटेल (29), अहमद अंसारी (26) और इरफान शेख (22) को गिरफ्तार कर कुल 28 मोटर साइकल बरामद की हैं। पुलिस को जानकारी मिली थी कि मालवणी इलाके में रहने वाले कुछ लोग बाइक चोरी कर उन्हें सस्ते दामों में बेच देते हैं। इस गिरोह में टैंपो ड्राइवर, बेस्ट कंडक्टर और एक गैरेज के कुछ लोग शामिल है। ये लोग क्षतिग्रस्त वाहनों को पेपर के साथ सस्ते दामों में खरीदने के बाद उन्हीं वाहनों के पेपर के आधार पर चोरी की गई मोटर साइकिलों को बेच देते थे। ये लोग चोरी किए गए वाहनों की नंबर प्लेट और चेसिस नंबर को परिवर्तित कर दूसरों को बेचते थे। बहरहाल चारों आरोपी क्राइम ब्रांच के कब्जे में हैं।

Monday, May 16, 2011

बाबा रामदेव की दवाएं लेने वाली मुंबई की एक महिला ने मुकदमा ठोक दिया

बालों को झड़ने से बचाने के लिए बाबा रामदेव की दवाएं लेने वाली मुंबई की एक महिला ने मुकदमा ठोक दिया है। मुंबई मिरर के अनुसार उस आयुवेर्दिक दवा से 2 ही दिन में मुंबई के भयंदर इलाके में रहने वाली महिला की जिंदगी पर बन आई थी। आहार नली में दवाई ठोस रूप में जमती जा रही थी। 39 साल की जश्मी शंकर नरपुला के लिए कुछ भी पीना तक मुश्किल हो गया था। वह कुछ साल से बाल झड़ने की समस्या से परेशान थी। बाबा के एक टीवी कार्यक्रम से उन्हें इस दवा की जानकारी मिली थी। अंतत: शुक्रवार को परेल स्थित केईएम अस्पताल में डॉक्टरों को ऑपरेशन कर उस जाम को क्लीयर करना पड़ा। आमतौर पर जिस ऑपरेशन में 15-20 मिनट का समय लगता है, इस महिला के केस में 3 घंटे का समय लगा। मुकदमा भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया गया है। वहीं दूसरी ओर बाबा के पतंजलि योगपीठ ने इन आरोपों का खंडन किया है। योगपीठ का कहना है कि उन्हें इस तरह की कोई और शिकायत नहीं मिली है। नरपुला ने बताया कि वह दवाई (पाउडर) मुंबई के ही शांति नगर इलाके में स्थित योग पतंजलि शॉप से खरीदी थी। आयुर्वेदिक कंसलटेंट ने उन्हें 2 प्रकार की दवाई दी और खाली पेट में लेने के कहा। उन्होंने 2 दिन एक एक बार वह दवाई ली। उसके बाद अचानक ऐसी स्थिति हुई कि वह न तो कुछ बोल सकती थीं और न ही कुछ निगल सकती थीं। कोशिश करने पर तेज दर्द होता था। केईएम अस्पताल की ईएनटी (आंख, नाक, गला) हेड नीलम सेठ ने कहा: यह हैरतअंगेज था। वह कुछ खा नहीं सकती थीं, न ही कुछ पी सकती थीं। अंदर काले रंग की कोई चीज जमी हुई थी। काफी ठोस होने के कारण उसे निकालना भी मुश्किल था। मरीज ने मेडिकल हिस्ट्री में बताया था कि उन्होंने बाबा रामदेव के आयुर्वेदिक स्टोर की दवाई ली है। आहार नली से निकाली गई चीज को विश्लेषण के लिए लैब भेजा गया है। इसके बाद ही पता चलेगा कि क्या जाम हुआ था?

Tuesday, May 10, 2011

'रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया' (आरपीआई) के साथ जल्द ही गठजोड़

शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी का 'रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया' (आरपीआई) के साथ जल्द ही गठजोड़ हो सकता है। अपने बांद्रा स्थित आवास 'मातोश्री' में दलित नेता और आरपीआई के पूर्व सांसद रामदास अठावले के साथ हुई मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान ठाकरे ने यह बात कही, हालांकि इसके लिए उन्होंने किसी निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं किया।

उन्होंने कहा कि आरपीआई के साथ हमारे (शिवसेना-बीजेपी) गठजोड़ को लेकर किसी तरह की व्यग्रता की जरूरत नहीं है। सारी बातें जल्दी ही सुलझा ली जाएंगी। इस मुलाकात के दौरान बाल ठाकरे के पुत्र व पार्टी के कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे व कुछ अन्य दलित नेता भी मौजूद थे।

इस बैठक को, ठीक नौ महीने बाद होने जा रहे बीएमसी के हाई-प्रोफाइल चुनाव के मद्देनजर बहुत महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। राज्य और केंद्र की सरकार को 'अहंकारी' बताते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि सरकार के रवैये ने हमें एकसाथ आने और आंदोलन छेड़ने का मौका दिया है।

उन्होंने कहा कि बहुत से मुद्दों पर सरकार का अहंकारी रुख देखने को मिला है, जिसने देश की जनता को आंदोलन के लिए मजबूर किया है। उन्होंने इस क्रम में रत्नागिरि जिले के जैतापुर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना और उत्तर प्रदेश में किसानों के आंदोलन का उल्लेख किया।

मुंबई में 1993 में हुए सीरियल ब्लास्ट के मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम को भारत लाए जाने के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब में ठाकरे ने कहा, 'अगर हमारी सरकार बनती है तो मैं कुछ जरूर करूंगा।'

गौरतलब है कि अठावले ने शिवसेना-बीजेपी युति के साथ गठजोड़ का प्रस्ताव लेकर जनवरी में ठाकरे से मुलाकात की थी। अठावले ने पत्रकारों से कहा कि शिवसेना-बीजेपी के साथ गठजोड़ पर सकारात्मक बातचीत जारी है और अक्टूबर तक इसके साकार होने की संभावना है।

Sunday, May 1, 2011

स्कायवॉक मजनुओं का अड्डा

बदलापुर, उल्हासनगर, कल्याण में एम.एम.आर.डी.ए. विभाग में करोड़ों रुपया स्कायवॉक बनाने की योजना में खर्च किया है। जबकि उल्हानगर, बदलापुर में बने स्कायवॉक मजनुओं का अड्डा बनता जा रहा है। जिसके कारण सज्जन परिवार की महिला, पुरुषों का स्कॉयवाक से यात्रा करने में असुविधा होने लगी है। शासन द्वारा करोड़ों रुपया खर्च कर निर्माण किये गये स्कॉय वाकों पर सड़क छाप मजनू डेरा जमाए रहते हैं। जिस पर अंकुश नहीं लगने से स्कॉयवॉक की यात्रा करने वाले लोग यहां से रास्ता बदलने लगे हैं। कभी-कभी तो अंधेरे का फायदा उठाकर युगलप्रेमी अश्लील हरकतें करते हैं। बता दे कि रेलवे व स्थानिक पुलिस थाने के सुरक्षा कर्मी भी स्कायवाकों पर घटने वाली इन हरकतों को नजर अंदाज कर देते हैं। जिसका खामीयाजा शरीफ यात्रियों को उठाना पड़ रहा है। अब आम लोग प्रशासन से जानकारी मांगने लगे हैं, कि शासन ने करोड़ों रुपया जनता का खर्च कर स्कायवाक किस उपयोग के लिए बनाया है। और लंबी दूरी तक बने स्कायवाकों पर सुरक्षा व्यवस्था का इन्तजाम क्यों नहीं किया गया है।

कई शहरी यात्रियों ने बताया कि कभी-कभी स्कायवाक पर खड़े होने वाले लकडे शरीफ परिवार की महिलाओं, लड़कियों को यात्रा करने में अड़चने पैदा कर देते हैं। बता दें कि उल्हासनगर व बदलापुर में पुर्व, पश्चिम क्षेत्र से जोड़ने के लिए बनाये गये स्कायवाक निर्माण किया है।

Monday, April 25, 2011

पाइप लाइन से होने वाले पानी के लीकेज की मरम्मत कर उसे रोकने के लिए विशेष अभियान

बीएमसी का वाटर डिपार्टमेंट 25 अप्रैल से 9 मई तक 'लीकेज रोको, पानी बचाओ' नामक पंद्रह दिवसीय मुहिम की शुरूआत करेगा। इस दौरान पाइप लाइन से होने वाले पानी के लीकेज की मरम्मत कर उसे रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अभियान के तहत बीएमसी के सहायक इंजिनियर अपने-अपने संबंधित डिपार्टमेंट ऑफिस में सर्वेक्षण करेंगेे। लीकेज की जानकारी मिलते ही डिप्युटी कमिश्नर, असिस्टेंट कमिश्नर और ट्रैफिक पुलिस अधिकारी को बताया जाएगा, और उनके निरीक्षण में लीकेज की मरम्मत का काम चलेगा। इसके अलावा अगर प्रशासन के पास मरम्मत के औजार यदि नहीं मिलता है तो कार्यकारी इंजिनियर इसका इंतजाम ठेकेदारों की मदद से करेंगे। मंुबई को पानी की सप्लाई करने वाली झीलों में इस समय बीते साल की तुलना में अधिक पानी है। प्रशासन का कहना है कि मंुबई में 15 जुलाई तक पानी की कमी नहीं होगी। हालांकि इसके बावजूद कई इलाकों में आज भी पानी की सप्लाई सही ढंग से नहीं होती है। कई जगहों पर तो पानी एकदम गंदा आता है या तो आता ही नहीं। इसी सिलसिले में बीएमसी की साधारण सभा में कई बार नगरसेवकों ने हंगामा भी किया।

Sunday, April 24, 2011

साईं बाबा के पार्थिव शरीर को दर्शन के लिए शाम छह बजे से पुट्टपर्थी के साईं कुलवंत हॉल में रखा जाए

पिछले 28 दिनों से पुट्टपर्थी के अस्पताल में मौत से जूझ रहे सत्य साईं बाबा का निधन हो गया है। श्री सत्य साईं इंस्टिट्यूट ऑफ हायर मेडिकल साइंसेज के मुताबिक बाबा ने श्वसन तंत्र निष्क्रिय होने के बाद सुबह 7.40 बजे अंतिम सांस ली।

साईं बाबा के पार्थिव शरीर को दर्शन के लिए शाम छह बजे से पुट्टपर्थी के साईं कुलवंत हॉल में रखा जाएगा। भक्त उनके शरीर का दो दिन तक दर्शन कर सकेंगे। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। आंध्र प्रदेश सरकार ने चार दिन के शोक की घोषणा की है। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और कई अन्य ने उनके निधन पर शोक जताया है।

बाबा के निधन के खबर से उनके भक्तों में शोक की लहर लौड़ गई है। भक्त बड़ी तादाद में पुट्टपर्थी में आश्रम के बाहर जमा हो रहे हैं। पुलिस ने वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी कर दिए हैं। देश-विदेश से साईं के भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है।

साईं बाबा के भक्तों में देश के कई बड़े राजनेता , सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्टों के जज , सेना के अधिकारियों के अलावा व्यापार , खेल और फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हैं।

86 वर्षीय साईं बाबा को हृदय और सांस संबंधी तकलीफों के बाद 28 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। हालत नाजुक होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। लो ब्लड प्रेशर और लिवर बेकार होने से उनकी हालत और चिंताजनक हो गई थी। इसके बाद उनके शरीर के लगभग सभी अंगों पर दवाइयां बेअसर साबित हो रही थीं।

बाबा के निधन के बाद उनके जन्मस्थान पुट्टपर्थी की सभी दुकानों को बंद करवा दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। लगभग 6 हजार सुरक्षाकर्मियों को पुट्टपर्थी में तैनात किया गया है। स्थिति बेकाबू होने के डर से शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है।

बाबा का जन्म सन् 1926 में पुट्टपर्थी में हुआ था। यह तब आंध्र प्रदेश के पिछड़े माने जाने वाले अनंतपुर जिले का एक छोड़ा सा कस्बा हुआ करता था। साईं बाबा का असली नाम सत्यनारायण राजू था। 14 साल की उम्र में खुद को भगवान का अवतार घोषित करने और अपने चमत्कारिक कारनामों से लोगों का उनमें विश्वास बढ़ता चला गया। लेकिन जब उन पर जब जादू के जरिए यह सब करने के आरोप लगे , तो उन्होंने चमत्कार दिखाने बंद कर दिए। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान सामाजिक कार्यों पर फोकस कर दिया।

Thursday, April 14, 2011

निर्माण कार्य शुरू करने से पहले वहां पर लेबर कैंप बनाने अनिवार्य होंगे

महानगर को डिवेलप करने वाले बिल्डरों के सामने बीएमसी नई शर्त रखने जा रही है। डिवेपलर्स को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले वहां पर लेबर कैंप बनाने अनिवार्य होंगे, वर्ना बीएमसी बिल्डिंग बनाने की अनुमति नहीं देती। यह शर्त छोटे व मीडियम बिल्डरों के लिए एक मुसीबत बन जाएगी। नई शर्त जोड़ने से प्रॉजेक्ट लागत में निश्चित ही बढ़ोतरी होगी जिसकी वसूली बिल्डर घर खरीदने वालों से ही करेगी। इससे मकानों की कीमतें बढ़ जाएगी। इस बाबत बीएमसी के डायरेक्टर अशोक शिंत्रे ने बताया कि आईओडी (इंटीमेशन ऑफ डिसअप्रूवल) में यह नई शर्त जोड़ने के बाबत खाका तैयार किया जा रहा है। इस बारे में डिवेलपमेंट प्लान डिपार्टमेंट नियम कानून बना रहा है। दरअसल, पिछले दिनों शहर का एक नामी बिल्डर अपनी योजना मंजूरी कराने के लिए कमिश्नर सुबोध कुमार के पास आया। बिल्डर ने अपने प्रॉजेक्ट का नक्शा कमिश्नर के सामने रखा। उस बिल्डर का बड़ा प्रॉजेक्ट था और उसने अपने प्रोजेक्ट में लेबरों के लिए लेबर कैंप बनाने का प्रावधान कर रखा था। लेबर कैंप के बात कमिश्नर के दिमाग के घर कर गई। बिल्डर जैसे की उनके दफ्तर से बाहर निकला वैसे ही उन्होंने डायरेक्टर अशोक शित्रे को बुलाया। उन्होंने शित्रे को आदेश दिया कि वे आईओडी में लेबर कैंप बनाने की शर्त अनिवार्य करें। कमिश्नर के आदेश का पालन करते हुए डिवेलपमेंट प्लान डिपार्टमेंट के अधिकारी माथापच्ची कर रहे हैं। इन अधिकारियों का कहना है कि बड़े प्रॉजेक्ट में लेबर कैंप बनाया जा सकता है मगर छोटे प्रॉजेक्ट में यह संभव ही नहीं है। हालांकि, छोटे व मीडियम प्रॉजेक्ट में लेबर के लिए सहूलियत दी जाती है और हमारे असिस्टेंट इंजिनियर निर्माण कार्य स्थल पर जाकर खुद मुआयना करते हैं और उसे मंजूर भी करते हैं। उन्होंने बताया कि लेबर कैंप अस्थायी होता है जैसे ही बिल्डिंग बन कर तैयार हो गई वैसे ही डिवेलपर्स लेबर कैंप को हटा देगा। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लेबर कैंप अनिवार्य करने से निर्माण खर्च बढ़ेगा जिसकी वसूली बिल्डर घर खरीदने वालों से ही करेगा। लेबर कैंप में मजदूरों को बुनियादी सुविधा मुहैया कराई जाती है। खाना बनाने के लिए कमरे , शौचालय और नहाने के लिए कमरे , उनके बच्चों को पढ़ाई - लिखाई की सुविधा , मेडिकल सुविधा जैसी अन्य सुविधा कराना होता है। यह लेबर कैंप तब तक के लिए रहता है जब तक कि निर्माण कार्य स्थल का काम पूरा नहीं हो जाता। जैसे ही निर्माण कार्य पूरा हुआ वैसे ही इसे तोड़ कर गिरा दिया जाता है।