Monday, November 30, 2009

स्मिता ठाकरे ने कहा , ' मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बड़ी प्रशंसक बन गई

यह किसी की सोच से भी परे होगा कि ठाकरे परिवार का कोई सदस्य शिवसेना छोड़कर धुर विरोधी कांग्रेस में शामिल हो सकता है। लेकिन ऐसा हो रहा है। बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे ने भगवा कैंप छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला कर लिया है।
बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे ने कहा , ' मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बड़ी प्रशंसक बन गई हूं और चाहती हूं कि देश के लिए जो अच्छा काम वे कर रहे हैं , मैं उसका हिस्सा बनूं। ' स्मिता के इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे दो कारण हैं। पहला , स्मिता ठाकरे को लगता है कि शिवसेना अपनी संकुचित नीतियों के जरिए महाराष्ट्र के लोगों का अहित कर रही है। दूसरा , परिवार के भीतर वह खुद को अलग - थलग महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा , ' मैं यह घुटन अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती और इसलिए कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया है। कांग्रेस के पास राष्ट्रीय और वैश्विक सोच है और मैं इस पार्टी की विचारधारा से सहमत हूं। '
स्मिता ने आरोप लगाया कि उन्हें राज्यसभा में भेजने का वादा किया गया था लेकिन यह पूरा नहीं हुआ और पेशे से पत्रकार भरत कुमार राउत को राज्यसभा में भेजा गया। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट देने का वादा किया गया था लेकिन यह भी नहीं निभाया गया। और तो और सामना के लिए लिखे उनके लेख को , अखबार के संपादक बाल ठाकरे ने अस्वीकार कर दिया , जबकि उनका एक लेख पहले ही सामना में छप चुका था। स्मिता ने कहा , ' मुझे संदेश मिल गया था कि अब यहां मेरी कोई जगह नहीं है और मैंने वह आर्टिकल वहीं पर फाड़ कर फेंके दिया। मेरे लिए शिवसेना से अलग होना आसान नहीं है लेकिन अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। ' स्मिता ठाकरे ने सोनिया और राहुल की जमकर तारीफ की और कहा कि , ' व्यक्तिगत रूप से मैं सोनिया जी और जिस तरह से उन्होंने पार्टी और नेतृत्व किया है की प्रशंसक हूं। राहुल लो प्रोफाइल बनाकर रखते हैं लेकिन वह देश के लिए काफी काम कर रहे हैं। ' स्मिता ठाकरे ने बताया कि वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेताओं के संपर्क में हैं और पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल होना बस एक औपचारिकता रह गई है। इस सिलसिले में वह जल्दी ही सोनिया और राहुल गांधी से मुलाकात कर सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक , कांग्रेस के लिए ठाकरे परिवार के किसी सदस्य का पार्टी में शामिल होना , बड़ा अचीवमेंट होगा। ऐसा कहा जा रहा है कि स्मिता ठाकरे को पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। शिवसेना - बीजेपी शासन के दौरान स्मिता ठाकरे अहम पावर सेंटर थीं और आला अधिकारियों से लेकर व्यापार से जुड़े लोग उनके आगे - पीछे घूमते रहते थे। उस समय यह कहा जाता था कि स्मिता अपने ससुर बाल ठाकरे के सबसे करीब हैं। उन्होंने बाल ठाकरे के दूसरे करीबी लोगों पर खुद को हाशिये पर भेजने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा , ' उन लोगों ने एक सामाजिक कार्यकर्ता और फिल्म प्रड्यूसर की मेरी पहचान को बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने बॉलिवुड में लोगों को फोन पर धमकियां दीं और मुझसे कोई संबंध न रखने को कहा। ' स्मिता बाल ठाकरे के बड़े बेटे जयदेव की पत्नी हैं। उन्होंने कहा कि वह राज ठाकरे की नीतियों का समर्थन नहीं करतीं और इसलिए एमएनएस में जाने का उन्हें ख्याल भी नहीं आया। उन्होंने कहा , ' मुझे गर्व है कि मैं मराठी हूं और घर पर मराठी में ही बात करती हूं लेकिन मैं यह भी चाहती हूं कि समय के साथ मराठी भी बदलें। आज के जमाने में अंग्रेजी को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता। चीन के लोग भी यह बात जानते हैं। मैं चाहती हूं कि मराठी सिर्फ पी . एल . देशपांडे का साहित्य न पढ़ें बल्कि प्रेमचंद और दूसरी भाषाओं के साहित्यकारों को भी पढ़ें। ' उद्धव ठाकरे के बारे में स्मिता ने कहा कि , ' मुझे लगता है कि बालासाहब ने उन्हें बहुत जल्दी , बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। यह जिम्मेदारी देने से पहले उन्हें राजनीति में और ट्रेनिंग देनी चाहिए थी।

Friday, November 27, 2009

अजमल आमिर कसाब के वकील अब्बास काजमी ने हमलों के मामले की सुनवाई कर रही ट्रायल कोर्ट से माफी मांगी।

मुंबई हमले में जिंदा गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल आमिर कसाब के वकील अब्बास काजमी ने हमलों के मामले की सुनवाई कर रही ट्रायल कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने अपनी इस टिप्पणी के लिए शुक्रवार को बिना शर्त माफी मांग ली कि वह अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों के हलफनामों की परवाह नहीं करते। जज एम. एल. तहलियानी ने भी काजमी की माफी को मंजूर करते हुए अपनी यह टिप्पणी वापस ले ली कि काजमी झूठे हैं। काजमी ने इस बात से इनकार किया था कि विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने 8 मई को अपने शुरुआती संबोधन में कहा था कि वह गवाहों के हलफनामे दाखिल करेंगे। इस पर जज ने गुरुवार को उन्हें झूठा कहा था। कसाब के वकील ने शुक्रवार को कहा कि यह एक ऐतिहासिक मुकदमा है और मैं आरोपित का बचाव करने के लिए अपनी ओर से बेहतरीन कोशिश कर रहा हूं। गुरुवार को जो कुछ हुआ, वह जज्बात में बहकर हुआ और मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं। तहलियानी ने कहा कि मैं भी काजमी के बारे में अपनी टिप्पणियां वापस लेता हूं, क्योंकि मैं चाहता हूं कि यह मुद्दा सौहार्दपूर्ण ढंग से हल कर लिया जाए।

Wednesday, November 25, 2009

शिवसेना के पूर्व सांसद मोहन रावले ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर गावस्कर को नहीं, तेंडुलकर को भारत रत्न देने की मांग की थी।

इन दिनों जब शिवसेना भारत के दो महान क्रिकेटरों सचिन तेंडुलकर और सुनील गावस्कर को केवल मराठी पहचान तक सीमित करके उनके बीच बदमजा तुलना कर रही है, तब यह जानना दिलचस्प होगा कि कुछ दिनों पहले ही शिवसेना के पूर्व सांसद मोहन रावले ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर गावस्कर को नहीं, तेंडुलकर को भारत रत्न देने की मांग की थी। 6 नवंबर 2009 को रावले ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि क्रिकेट में सचिन के महान योगदान के देखते हुए इस शीतकालीन सत्र के दौरान संसद के सेंट्रल हॉल में सचिन को आमंत्रित करके उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए। सचिन के रेकॉर्डों का विस्तार से वर्णन करते हुए उन्हें भारतरत्न देने की भी मांग की। सचिन द्वारा खुद को मराठी से पहले भारतीय बताने पर शिवसेना ने जब उन पर आरोपों की बौछार शुरू कर दी, तो रावले खामोश हो गए। वह शिवसेना से सबसे ज्यादा पांचबार लोकसभा पहुंचे हैं। वह पहली बार 2009 में ही हारे हैं। शिवसेना के पूर्व सांसद ने जिसके लिए भारत रत्न की मांग की, उसी का खुद को भारतीय बताना अब शिवसेना को रास नहीं आ रहा। सचिन पर शिवसेना में मतभेद : सचिन को लेकर शिवसेना में अंदर ही अंदर मतभेद उभर रहे हैं। मंगलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत के निवास पर शिवसेना सांसदों का डिनर था। वहां कुछ सांसदों ने कहा कि सचिन को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। वह महाराष्ट्र के युवाओं का आदर्श हैं। यह भी कहा जा रहा है कि गावस्कर के लिए शिवसेना का यह कहना कि उन्होंने महाराष्ट्र के खिलाड़ियों को तरजीह दी, उत्तर भारत के उन क्रिकेटरों के आरोपों की पुष्टि है जो यह कहते रहे हैं कि उनके साथ क्षेत्रीय आधार पर भेदभाव हुआ। एक क्रिकेटर सांसद ने कहा कि बिशन सिंह बेदी और कपिल देव के कप्तान बनने के बाद मुंबई के बाहर के क्रिकेटरों को मौका मिलना शुरू हुआ। गावस्कर के समय में भारतीय टीम में 8-8 महाराष्ट्रीय खिलाड़ी खेले।

Monday, November 23, 2009

मराठी के बाद हिंदी का स्थान आना चाहिए,

मराठी में शपथ नहीं लेने को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में एमएनएस के हमले का सामना करने वाले समाज वादी पार्टी विधायक अबू आसिम आजमी अगले साल टीवी पर एक डिबेट में राज ठाकरे का मराठी में सामना कर सकते हैं। आजमी ने मराठी सीखने के लिए एक टीचर रखा हुआ है। उन्होंने कहा, 'मैंने पांच साल पहले भी मराठी सीखने के लिए एक टीचर रखा था। लेकिन उस वक्त मैं संसद सदस्य था और मराठी की जरूरत नहीं थी।' उन्होंने कहा, 'अब राज्य विधानसभा का सदस्य बनने के बाद मुझे लगता है कि मराठी अवश्य सीखनी चाहिए। मैं इसे रोजाना लगभग एक घंटे सीखता हूं।' आजमी ने कहा, 'महाराष्ट्र के विधायक को मराठी जानना जरूरी है। लेकिन राज्य में मराठी के बाद हिंदी का स्थान आना चाहिए, क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर यह भाषा भी बोली जाती है।'

Sunday, November 22, 2009

बीएसई मराठी में वेबसाइट बनाने के लिए तो राजी हो गया

अपने 'मराठी फैलाओ' अभियान में राज ठाकरे और उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को दो बड़ी स
फलताएं मिलीं। एक तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज उनकी मांग के आगे झुक गया। दूसरे, महाराष्ट्र के सीएम अशोक चव्हाण ने भी उनकी एक बड़ी मांग का समर्थन कर दिया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को चिट्ठी लिखकर कहा था कि वह अपनी वेबसाइट मराठी में बनाए। इस बात के लिए बीएसई राजी हो गया है। एमएनएस ने धमकी भरे अंदाज में कहा था कि शुक्रवार तक मराठी में वेबसाइट बना ली जानी चाहिए। बीएसई मराठी में वेबसाइट बनाने के लिए तो राजी हो गया है, लेकिन वह शुक्रवार तक वेबसाइट तैयार कर पाएगा या नहीं, इस बारे में अभी कुछ नहीं बताया गया है। बीएसई मैनेजमेंट ने एमएनएस से वादा किया है कि जल्दी ही मराठी में वेबसाइट लॉन्च की जाएगी। उधर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने शनिवार को रेलवे से कहा कि ज्यादा से ज्यादा मराठियों की भर्ती करे। चव्हाण ने रेल मंत्री ममता बनर्जी से यह अपील की है कि और ज्यादा स्थानीय लोगों को रेलवे में नौकरियां दी जाएं। ऐसा लगता है कि मराठी राग अलापते हुए चव्हाण राज ठाकरे की राह पर चल पड़े हैं।

Monday, November 16, 2009

सचिन और बाल ठाकरे के बोल

मैं मराठी हूं और मुझे इस पर गर्व है। लेकिन मैं पहले भारतीय हूं और मुंबई सभी भारतीयों की है।(शनिवार को मीडिया से बातचीत में सचिन तेंडुलकर ने यह बयान दिया था।) ऐसा बयान देकर सचिन ने एक फालतू रन ले लिया, लेकिन मराठी मानूस के दिलोदिमाग की पिच से वह रन आउट हो गए। जब मराठी मानूस को मुंबई मिली, तब तुम पैदा भी नहीं हुए थे। इसे पाने के लिए 105 मराठी लोगों ने बलिदान दिया। तुम्हारे क्रीज छोड़कर पॉलिटिक्स की पिच में घुसने से मराठियों का दिल दुखा है। -बाल ठाकरे (सचिन के बयान का जवाब शिव सेना के मुखपत्र 'सामना' में दिया) यह वही भाषा है, जो मोहम्मद अली जिन्ना बोलते थे। शिव सेना के नेता और राज ठाकरे की पाटीर् के नेताओं को छोड़कर पूरा भारत और सारे मराठी तेंडुलकर के साथ हैं।

पुलिस ने इस मामले में 12 शिवसैनिकों को हिरासत में लिया है।

भोजपुरी गायक और स्टार मनोज तिवारी के वर्सोवा स्थित दफ्तर पर कुछ अज्ञात लोगों ने सोमवार को हमला किया और तोड़फोड़ की। तोड़फोड़ की इस कार्रवाई को मुंबई में शिवसेना और एमएनएस के उत्तर भारतीयों के खिलाफ जारी अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में 12 शिवसैनिकों को हिरासत में लिया है। मनोज तिवारी ने इस पर हैरानी जताई है। उधर, पुलिस मामले की जांच कर रही है। गौरतलब है कि मनोज तिवारी यूपी के गोरखपुर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े थे। वह पहले भी राज ठाकरे की एमएनएस और शिवसेना के निशाने पर रहे हैं।