Wednesday, October 22, 2014

200 उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए

ठाणे जिले के 18 विधानसभा सीटों से चुनाव मैदान में रहे 238 में से 200 उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए हैं। इस चुनाव में खास बात यह रही कि जिले के 16 निवर्तमान विधायकों में से 7 को हार का मुंह देखना पड़ा है। इसके अलावा इस चुनाव से जिले से कांग्रेस तथा एमएनएस पूरी तरह बाहर हो गई है। प्रमुख पार्टियों में एमएनएस के 13, कांग्रेस के 17 उम्मीदवारों, शिवसेना तथा बीजेपी के तीन-तीन और एनसीपी के 12 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। शिवसेना, कांग्रेस तथा एनसीपी ने सभी 18, एमएनएस ने 14 तथा बीजेपी ने 17 स्थानों पर उम्मीदवार उतारा था।
प्रमुख उम्मीदवारों में एनसीपी के निरंजन डावखरे, हनुमंत जगदाले, महेश तपासे, कांग्रेस के अब्दुल राशीद ताहीर मोमिन, प्रभात पाटील, मोहन तिवारी तथा नारायण पवार शिवसेना मनोज काटेकर तथा प्रभाकर म्हात्रे, एमएनएस के सुधाकर चव्हाण, निलेश चव्हाण, हरिश्चंद्र पाटील, सेजल कदम तथा प्रकाश भोईर अपनी जमानत बचाने में असफल रहे हैं। लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में ठाणे जिले के लोगों ने कांग्रेस तथा एमएनएस को पूरी तरह से नकार दिया है। कांग्रेस के पास जिले में भिवंडी की एकमात्र विधानसभा सीट थी और सुरेश टावरे विधायक थे, लेकिन कांग्रेस ने इस बार एकमात्र सीट को भी गंवा दिया।

एमएनएस के पास विधानसभा की दो सीटें थी, इस चुनाव में कल्याण रूरल तथा कल्याण वेस्ट दोनों से एमएनएस को हार का सामना करना पड़ा है। जिले में 16 निवर्तमान विधायक चुनाव मैदान में थे, जिसमें से 9 फिर से विधानसभा में पहुंचने में सफल हुए, लेकिन 7 को हार का सामना करना पड़ा। दुबारा जितने वालों में शिवसेना के एकनाथ शिंदे, प्रताप सरनाईक, बालाजी किणीकर, रुपेश म्हात्रे, एनसीपी के जीतेंद्र आव्हाड, संदीप नाईक, बीजेपी के रवींद्र चव्हाण, रुपेश म्हात्रे, किसन कथोरे तथा निर्दलीय विधायक गणपत गायकवाड का समावेश है। जिन विधायकों को हार का सामना करना पड़ा है, उनमें रमेश पाटील, कुमार आयलानी, प्रकाश भोईर, गणेश नाईक, गिल्बर्ट मेंडोसा, राशिद ताहीर मोमिन, दौलत दरोडा का समावेश है।

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